नेत्रहीन कल्याणकारी संस्था ने वार्षिक-समारोह पर दिव्यांगों को राशन-वितरण किया

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रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया

दिल्ली : जीटीबी नगर स्थित तेग बहादुर के सिंह सभा गुरुद्वारा मे नेत्रहीन कल्याणकारी संस्था ने मकर सक्रांति पर लुइज ब्रेल वार्षिक समारोह मनाया गया। संस्था से जुड़े डेढ़ सौ के करीब दिव्यांगों ने इस कार्यक्रम मे हिस्सा लेते हुए अपनी गायकी, शायरी और कविता को प्रस्तुत करके अपने हुनर के द्वारा कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का मन जीतकर, “वाह” क्या बात है, कहने को मजबूर कर दिया। इस संस्था के महासचिव जो खुद दिव्यांग है ने मीडिया से बताया कि उनकी संस्था के साथ जुड़े दिव्यांगो मे ज्यादातर घर-परिवार वाले लोग है। जो इस समय बेरोजगारी की हालत में हैं। “एग्री फूड-प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” संस्था के डेढ-सौ लोगो को हर महीने के दूसरे रविवार को उनके परिवार के पेट निर्वाह के लिए एक महीने का राशन-वितरण करती है। लेकिन मेरे पास अभी उन्नतालीस के करीब और दिव्यांग है, जिनके लिए पेट-निर्वाह करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। मेरी समाज के प्रतिष्ठत लोगो से अपील है कि इन लोगो के जीवन निर्वाह के लिए आगे आए, पढ़े लिखे होने के बाबजुद हमारे पास ना नौकरी है, ना स्वंय रोजगार का कोई साधन है। जिससे हम अपना जीवन निर्वाह कर सके। इस समय हम समाज की दया का पात्र बने रहने को मजबूर है।

सविधान के अनुसार हमारे लिए बहुत कुछ है, लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने हम दिव्यांगो के लिए उसे धरातल पर नहीं उतारा है। हम दृष्टि-बाधित लोग सामान्य लोगों से बेहतर काम कर सकते है। क्योकि हमारे अन्दर काम करने की इच्छा शक्ति हमेशा जागृति रहती है। यदि हमें मौका दिया जाए, तो हम साबित कर सकते है कि हम किसी से कम नहीं है। कार्यक्रम में आए गणमान्य अतिथियो मे साधना गर्ग ने कहां प्रधानमंत्री मोदी जी ने हमें विकलांग से दिव्यांग नाम दिया, जो हमें बहुत अच्छा लगा। हम दिव्यांगो को होनहार होने के बावजूद अपने हुनर को उजागर करने का मौका नहीं मिलता है। हमें सिर्फ नाम नही, काम चाहिए, ताकि हम समाज की दया का पात्र ना बनकर, एक स्वाभिमानी तौर पर अपनी जिंदगी को व्यतीत कर सकें। इस अवसर पर समाजसेवी अनिल गांधी, सुनील गांधी और विमलता वेलफेयर ट्रस्ट की अध्यक्षा अनीता गुलेरिया द्वारा कंबल-वितरण किया गया। अनीता गुलेरिया ने कहा मैं अपने देशवासियों से अपील करना चाहूंगी कि आओ मिलकर आगे कदम बढ़ाए, इनके लिए स्वंय-रोजगार के साधन हम जुटाए। हमेशा के लिए अपनी दया का पात्र हम इन्हे ना बनाएं।

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