प्रेरणा- अस्थाई दुनिया के स्थायी सत्य : अतुल मलिकराम

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– खुलासच डेस्क

इंदौर : जब हम अपनी समास्याओं को देखते हैं तो वह हमेशा बड़ी दिखाई देती है जिसे सुलझाना कठिन लगता है, पर हमारे पास दूसरों की समास्याओं के लिए अनेक सुझाव होते है। यह इसलिए होता है क्योंकि हम तुरंत अपनी धारणा को बदल लेते है, और दूसरों की समस्याओं को देखने का हमारे दृष्टिकोण को एक अलग नजरिया मिल जाता हैं। जीवन में, अगर हम अपनी समास्याओं के साथ ऐसा करने में सक्षम हो जाए तो इसकी पूर्ण संभावना है कि हम अपनी हर समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि एक प्रसिद्ध वाक्य में कहा गया है कि ‘हर समस्या का हल होता है’। ऐसे कई लोग हैं जो जीवन में सफलता हासिल करना चाहते हैं और अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए शॉर्टकट तरीके ढूंढते हैं,  लेकिन वह यह नहीं जानते कि हर सफल कहानी के पीछे संघर्ष और कड़ी मेहनत जुड़ी होती है, जिसने एक सामान्य कहानी को सफलता की कहानी में तब्दील किया हैं। बहुत से लोग अपनी स्थिति को अपनी विफलता के लिए दोषी मानते हैं लेकिन स्थिति हमेशा हर किसी के लिए असामान्य रही है, और प्रयास की कमी से ही जीवन में अफसोस उत्पन्न होता है।

अतुल मलिकराम जी का कहना है कि ‘प्रेरणा कहीं और नहीं होती, हमेशा हमारे अंदर ही पाई जाती है, और यह हमारे जीवन के पहलुओं को बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं’। हमारे शरीर के अंदर तैरते हुए इस शक्तिशाली ऊर्जा से ‘शून्य से चरम’ तक पहुंचा जा सकता हैं। जैसे 1000 वीं सीढ़ी तक पहुंचने के लिए हमें पहली सीढ़ी से शुरुआत करनी पड़ती है, उसी तरह जीवन में भी अपनी आराम दायक जिंदगी से बाहर निकल कर हमारे लक्ष्य की ओर पहला कदम उठाना होगा।

तो एक सफल जीवन जीने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?  यहां कुछ बातें कहीं गयी है जो सफल जीवन जीने के लिए गेम-चेंजर का काम कर सकती हैं ऐसा जीवन जो दूसरों के लिए हमेशा एक सपने की तरह होता है। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी इच्छाओं के अनुसार अन्य चीजें कार्य करने लगती है, क्योंकि ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण होता है। हम सब ने महाभारत में अर्जुन के बारे में सुना और पढ़ा हैं, जिसने एक चिड़िया की आँख पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। यह आदत हर किसी के जीवन में जादू कर देती है, हमारी सभी ऊर्जा का ध्यान अगर एक ही दिशा में हो तो हमे हमारा सीधा रास्ता मिल जाता है। हमें अपने लक्ष्य पर फ़ोकस, फ़ोकस और अधिक फ़ोकस करने की जरुरत हैं, इससे आपका लक्ष्य अंततः आप पर आकर्षित हो जाएगा और आपको मिल जाएगा।

आरामदायक स्थिति से निकलना और संघर्ष करना

अपनी आरामदायक स्थिति से बाहर निकलना दूसरा कदम है जो यह तय करेगा की आप अपने लक्ष्य के प्रति कितने सजग है। कई लोग अपने आरामदायक स्थिति से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं करते हैं और आखिर में सामान्य लोगों की सूची में खुद को पातें हैं। इस बात से यह मतलब है कि न केवल अपने आप का मानसिक रूप से ख्याल रखना बल्कि, खुद के शरीर पर भी ध्यान देना है। कई बार शरीर की सही तरीके से देखभाल न करने पर आप काम करने की स्थिति में नहीं होते हैं। आपका प्रेरकस्तर और आपकी शारीरिक क्षमता समान होनी चाहिए और आपके उचित स्वास्थ्य को बनाए रखने से लक्ष्य की प्राप्ति हो सकती है। अतुल मलिकराम जी ने कहा है कि ‘स्वस्थ मन में ही स्वस्थ शरीर बसता है’ इस कहावत से हम आसानी से यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि चीजों को संभव बनाने के लिए हमें इसके अनुसार शरीर को बनाना होगा।

यह सब सामान्य कदम हो सकते हैं और विभिन्न स्रोतों से कई बार पढ़ा जा चुका है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इन चरणों का निष्पादन करना। जो इन चरणों का पालन करने की हिम्मत करता है, वह जीवन में अधिक से अधिक ऊंचाईयों को हासिल करता है। अपने लक्ष्य को हासिल करने से पहले हमें विश्वास करना होगा और विश्वास करने से पहले हमें अपने अंतर-मन में इसे धारण करना होगा।

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