पुनर्वसु नक्षत्र में भगवान राम का पूजन फलदायी

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– रिपोर्ट : सलिल पांडेय

मीरजापुर : वासन्तिक नवरात्र की नवमी तिथि में कर्क लग्न तथा तथा पनर्वसु नक्षत्र में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, लिहाजा इस समय विधि-विधान से भगवान की जयंती मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार 25 मार्च को महाष्टमी एवं नवमी दोनों तिथियों का मान है, अतः पूरे नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति इसी दिन होगी। इस दिन 1.29 से पुनर्वसु नक्षत्र लग जाएगा, लिहाजा इस समय भगवान की पूजा, हवन आदि करना चाहिए।

इस सम्बंध में आध्य्यात्मिक साहित्यकार सलिल पांडेय ने बताया कि भगवान के जन्म के समय अयोध्या में मांगलिक गीत, उत्सव आदि हुए थे, अतः पूजन के वक्त भजन, कीर्तन एवं मांगलिक गीत गाए जाने चाहिए। इसका वैज्ञानिक लाभ भी है। सुर-लय के साथ गीत गाने से घर-परिवार में सकारात्मक तरंगें निकलती है जो ध्वनि-प्रदूषण नियन्त्रण में सहायक होती है। श्री पांडेय ने धर्मग्रन्थों में रामनवमी व्रत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान राम की दिव्य मूर्ति जिसमें उनके बायीं ओर माता सीता हों तथा दाईं ओर लक्ष्मण हो, पूजा स्थल पर रखना चाहिए। पूजन में पदार्थों के अभाव में मन में ही प्रतिमा स्थापित कर ले तथा यह भाव मन में लाना चाहिए कि भगवान के दाहिने पिता दशरथ एवं माता कौशल्या भगवान की ओर देख रही हैं।

धर्मग्रन्थों में रामनवमी व्रत को सर्वोत्तम व्रत कहते हुए उल्लिखित है कि ‘अकृत्वा रामनवमीव्रतं सर्व व्रत उत्तमं, व्रतानि अन्यानि कुरुते न तेषां फल भाग्भवेत’ यानि सर्व व्रतों में उत्तम व्रत न करके अन्य व्रतों को जो करता है, उसे उन व्रतों का भी फल नहीं प्राप्त होता है। श्री पांडेय ने बताया कि जो लोग विधिवत पूजन करते हैं वे घर के उत्तर दिशा में मंडप बनाएं तथा मंडप के उत्तर स्वस्तिक इसके पूर्व में शंख, चक्र तथा श्री हनुमानजी को स्थापित करें, दक्षिण ओर धनुध और बाण तथा पश्चिम ओर तलवार रखें। मंडप चार हाथ का तथा बीच में वेदी बनाना चाहिए। श्रद्धालु जनों को चाहिए कि वे पूजन में सामर्थ्य से अधिक दान-दक्षिणा भौतिक पदार्थो से मोह-त्याग की भावना से करें।

पूजन में कृपणता का आशय खुद अपना मूल्यांकन कम करने का होता है। पूजक को धार्मिक कार्य में मोल-तोल से बचना चाहिए। जो अशक्त हैं, अभाव में है वे केवल मन में ही भगवान को स्थापित कर सारे कार्य तब तक करें जब तक वे सामर्थ्यवान नहीं हो जाते। श्री पांडेय ने कहा कि पूजन के अन्त में सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि एक बड़े समूह के कल्याण के लिए श्रीराम से प्रार्थना करनी चाहिए तथा दुष्टों तथा अत्याचारियों के दमन की भी विनती करनी चाहिए। नवमी के पूजन के बाद पूरे नवरात्र व्रत करने वाले दूसरे दिन सूर्योदय के बाद चढ़ाया हुआ कोई मीठा पदार्थ अल्प मात्रा में लेकर पारण करे ।

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