पुरुषोत्तम माह का कॄष्णपक्ष

0
150

रिपोर्ट : सलिल पांडेय

मीरजापुर : पुरुषोत्तम मास का कृष्ण पक्ष 30 मई को प्रतिपदा तिथि से शुरू हो गया, जो 13 जून को अमावस्या तिथि तक रहेगा। धर्मग्रन्थों के अनुसार शुक्लपक्ष देवपूजा एवं कृष्णपक्ष पितृ देवताओं की पूजा में श्रेष्ठ है।

नहीं सक्रिय हुए सनातन संस्कृति के झंडाबरदार

चूँकि पुरुषोत्तम मास तीन वर्षों के अंतराल पर पड़ता है, इसलिए इसकी महत्ता एवं इसमें किए, न किए जाने वाले कार्यों, उपायों को खासकर समाज में श्रेष्ठता का दावा करने वाले वाले लोगों और सनातन संस्कृति की दुहाई देने वाले संगठनों को करना चाहिए था, लेकिन ऐसे संगठन चूँकि अपनी पूरी ऊर्जा सिर्फ विविध चुनावों में ख़र्च कर देते हैं, इसलिए ऐसे संग़ठन इस अवसर पर खामोश ही दिखे।

गलत दान न करें

यद्यपि दान-दक्षिणा के बल पर सांसारिक मनौती नहीं पूरी होती लेकिन कुछ छद्म वेषधारियों ने पुरुषोत्तममास में दान-दक्षिणा से सारी रुकी-अटकी कामनाओं की पूर्ति का प्रलोभन देकर लोगों से सोना-चांदी तक दान में लिया जो सही नहीं है। सारे ग्रन्थों में गलत व्यक्ति, अज्ञानी एवं छद्म महन्थ-पुजारी को दान के दोष का उल्लेख है।

किसे करें दान

केवल दान के बल पर जीविकोपार्जन करने वाले को देने से बेहतर है कि ऐसे व्यक्ति को दान दिया जाए जो अपने कार्यों में दत्त-चित्त होकर लगने वाले के बावजूद अभाव में है।

पूर्वजों का करें सम्मान

पुरुषोत्तममास के कृष्णपक्ष में पितृदेवताओं की कृपा के लिए पूर्वजों के संस्कारों का पालन करना श्रेष्ठ है। माता-पिता, दादा-दादी यदि जीवित हैं, महिलाओं के लिए सास-श्वसुर भी, तो उनकी सेवा श्रेष्ठ है। यदि नहीं जीवित हैं तो उनमें जो आदर्श रहे हों, उसे जीवन में आत्मसात करना चाहिए। इनकी आत्मा की शांति के लिए जो भी दान-दक्षिणा दें, वह गोपनीय हो। मुंह खोलकर दान मांगने वाले को तो दान देने से बचें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.