किसी एक अंग की कमी नहीं कर सकती है योग्यता को निशक्त

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रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया

दिल्ली : शरीर के अंदर आई किसी एक अंग की कमी इंसान को निशक्त नहीं बना सकती। इस बात को फिर से दोहराया, दिल्ली केडीपीएम में रहने वाली आरके पुरम की लावण्या झा ने। आरके पुरम के डीपीएस स्कूल में पढ़ने वाली इस छात्रा ने पूरी तरह से दृष्टिबाधित होते हुए भी अपने बुलंद हौसले की उड़ान भरते हुए सीबीएसई टेस्ट में 12वीं कक्षा के नतीजे में 97.4% अंक प्राप्त कर पूरे देश में दिव्यांग कैटेगरी में तीसरा दर्जा हासिल किया है।

इस कैटेगरी में पहले दर्जे पर केरल के विजय गोंडा ने टॉप किया है। जबकि देहरादून से पूजा कुमारी ने दूसरा दर्जा हासिल किया है। इस तरह दिव्यांग कैटेगरी में 25 के करीब स्टूडेंट ने 95% अंक प्राप्त किए हैं। इसलिए हमारे समाज को अपनी मानसिकता को चेंज करते हुए इन दिव्यांगों को पंगु, निर्बल, बेचारा आदि कई शब्दों से संवेदनशील भरी विचार धाराओं से बाहर निकल इन जैसे योग्यतापूर्ण लोगों को सफल बनाकर राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़कर राष्ट्र निर्माण में इनको मुख्य योगदान देते हुए समान अधिकार व सम्मानपूर्वक-जीवन जीने का दर्जा दिला सकें। ना की निर्बल व असहाय का दर्जा……

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