किसानों के लिए योजनाओं के तहत हो रहे भ्रष्टाचार का खुलासा

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दिल्ली : पिछले 70 साल से देश में किसानों की जिन्दगी बदलने के अनगिनत वादे हो चुके हैं। लेकिन आधी शताब्दी से ज़्यादा गुज़र जाने के बाद भी जमीन पर किसान की हालत नहीं बदली। किसान के लिए बनाई जाने वाली योजनाएं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उत्तर प्रदेश में हादसे का शिकार होने पर गरीब किसान के परिवार की मदद करने के लिए मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना चलाई जा रही है. न्यूज़18 इंडिया की एक खास पड़ताल में भ्रष्टाचार के एक ऐसे जाल का पर्दाफाश हुआ जिसमें मरे हुए किसान का परिवार भी योजना के पैसे के लिए दर दर भटकता मिला।

उत्तर प्रदेश में चल रही मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत गरीब किसान की मौत होने पर परिवार को 6 महीने के अंदर 5 लाख रूपए की मदद दी जाती है. साथ ही मौत होने के 15 दिन के अंदर 30 हजार रूपए दिए जाते हैं. स्थाई तौर पर विकलांग होने पर भी ये मदद दी जाती है. इसके तहत 75 हजार रूपए से कम आमदनी वाले किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।

चैनल की टीम ने अपनी तहकीकात की शुरुआत कानपुर से की. कानपुर के सुरेंद्र मिश्रा के दामाद तेज कुमार की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. ये हादसा 8 जनवरी को हुआ था. इसके बाद से 70 साल के ये बुजुर्ग अपनी बेटी की खातिर योजना की पैसे पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. सरकारी दफ्तरों में बैठे रिश्वतखोर इनसे मदद के 5 लाख रूपए का 20 फीसदी यानी 1 लाख रूपए मांग रहे हैं.

चैनल के खुफिया कॅमरा पर रिश्वत माँगते हुए कैद हुए हरगोविंद तिवारी, स्टेनोग्राफर, वित्त विभाग, कानपुर. खुलेआम रिश्वत मांग रहे सरकारी बाबू रिश्वत की रकम भी कम करने को तैयार नहीं थे। और तो और रिश्वत के पैसे न होने पर उसने इसके इंतजाम का रास्ता भी बताया। जब हरगोविंद रिश्वत देना का तरीका ही समझा रहे थे उस समय बीमा कंपनी का सर्वेयर भी सामने आया. गौरतलब है की इनकी रिपोर्ट के बाद ही रकम पास होती है. बीमा कम्पनी के सर्वेयर धनंजय सिंह ने रिश्वत की डील पर और खुलकर बात की. सर्वेयर की दलील थी कि मृतक तेज कुमार खेती के साथ साथ कभी कभी होमगार्ड की ड्यूटी भी करते थे इसलिए नियमों के मुताबिक उन्हें योजना का लाभ मिल ही नहीं सकता. लेकिन अगर रिश्वत के 1 लाख रुपए दे दिए जाएं तो सब मुमकिन है।

इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया और हार्गोविंद तिवारी और धनंजय सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गयी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

रायबरेली में भी चैनल की टीम उन किसानों के परिवार मिली जो किसी परिवार वाले के गुजर जाने के बाद सरकारी मदद के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। 2018 की शुरुआत में रायबरेली की संगीता पाठक के ससुर और फिर पति आशीष पाठक का निधन ही गया. संगीता के दो छोटे बच्चे हैं. सरकारी मदद के बारे में पता चलने के बाद इन्होने भी दफ्तरों के चक्कर काटने शुरू किए. इन्होने लेखपाल से लेकर तहसीलदार एसडीएम दफ्तर के चक्कर काटे. कोई अधिकारियों से मिलने नहीं देता और साथ ही 50 हजार रूपए रिश्वत के तौर पर मांगे जा रहे हैं।

लेखपाल के दावे के मुताबिक संगीता की फाइल बीमा कंपनी तक पहुँचने के लिए तैयार थी. इस दावे की जांच करने के लिए चौनल की टीम ने वित्त विभाग में रेवन्यू इंस्पेक्टर अवधेश चौहान से बात की। उन्हांने बताया कि संगीता की कोई भी फाइल अब तक उनके पास नहीं पहुंची ही नही थी।

ऐसा नही था कि इस योजना का पैसा किसी को नहीं मिल रहा. जो भी रिश्वत देने के लिए तैयार हो जाता है उसे पैसा मिल भी जाता है रायबरेली के ही चंद्रभान सिंह के भाई की मौत 2015 में हुई थी. इनका आरोप है कि जब इन्होंने 70 हजार रुपए रिश्वत दी तो इन्हें योजना का पैसा मिल गया।

रायबरेली के कोइली खेड़ा गांव में रहने वाली आशाकली के पति भुइयादीन की मई 2016 को एक दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसके बाद वो भी सरकार से मिलने वाले पैसे के लिए अफसरों के दरवाजे पर पहुंची. यहां उन्होंनें कुछ पैसे भी दिए थे लेकिन उतनी रकम का इंतजाम नहीं कर सकीं जो उनसे मांगी जा रही थी

आशा कली के मामले की सच्चाई जानने के लिए चैनल की टीम डीएम ऑफिस पहुँची. यहां वित्त विभाग के क्लर्क आनंद पांडे ने बताया कि सरकार के पास बजट ही नहीं है।

न्यूज़18 इंडिया की टीम ने इस मामले को ले कर राज्य के कृषि मंत्री से भी बात की जिन्होंने पूरे मामले पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया. उन्होने कहा, “पड़ताल में पाया गया है कि कई जिलों में अधिकारी या तो पैसा मांग रहे हैं या फिर उन्हें दौड़ा रहे हैं लाभ नहीं मिल पा रहा है अगर ऐसी सूचना पाई जाती है तो उन अफसरों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।“

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