दिल्ली : सात साल की मासूम हुई दुष्कर्म का शिकार, चेहरा जलाकर शव को झाड़ियों में फेंका

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रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया

दिल्ली : दिल्ली हुई एक बार फिर शर्मसार। सात-साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद शव को झाड़ियों में फेंक दिया गया। इस घटना को लेकर स्थानीय निवासियों ने भारी रोष व्यक्त किया। सूत्रों के अनुसार परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी शाम 7 बजे के करीब पास ही के पार्क में पड़ोस की कुछ बच्चियों के साथ खेल रही थी, काफी देर तक वापस ना लौटने पर घरवालों ने बच्चे की तलाश शुरू की। उसके साथ खेल रही बच्चियां भी उसके बारे में कुछ नहीं बता पाई, तो परिजनो ने भलस्वा-डेयरी थाने में बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

बच्ची के परिवार वाले पूरी रात अपनी बच्ची को आसपास के इलाके में ढूंढते रहे। अचानक सुबह परिवार को खबर मिली यहा पास की झाड़ियों में एक बच्ची का शव पड़ा हुआ है। परिजनो के वहा पहुंचने पर पता चला कि शव उन्हीं की बच्ची का था। जिसके कपड़ों पर खून लगा हुआ था। ऐसा लग रहा था दुष्कर्म के बाद उसकी गला-घोट कर हत्या की गई हो और पहचान छुपाने के लिए मासूम-बच्ची के चेहरे पर जलाने के निशान भी पाए गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे में लेते हुए बाबू जगजीवन-राम अस्पताल के मोर्चरी खाने में भिजवाया। पुलिस के अनुसार बच्ची की मौत के कारणों का सपष्टीकरण मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

बच्ची परिवार-सहित भलस्वा-डेयरी के इलाके में रहती थी और सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। सूत्रों के मुताबिक बच्ची की मां ने लव मैरिज कर रखी थी। यह उसकी दूसरी शादी थी और मृत-बच्ची पहले पति की सन्तान थी। बच्ची के पिता ने भी दुसरी शादी कर रखी थी वह प्राइवेट-नौकरी करता है। पुलिस बच्ची के पिता से भी पूछताछ कर रही है। फिलहाल भलस्वा थाना पुलिस इस केस की हर एंगल से जांच कर आस-पास के लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाल कर आरोपी की पहचान करने मे जुटी है। अब देखना यह है कि दिल्ली-पुलिस इस मासूम-निर्भया के दुष्कर्मियों को कितनी जल्दी गिरफ्त में ले पाती है।

पोस्को एक्ट के मुताबिक फांसी की सजा होने के बावजूद भी लगता है, रेपिस्ट-दुष्कर्मियों को किसी तरह का कोई खौफ नहीं है और रोज आए दिन नाबालिग मासूमों को निर्भया का रूप अख्तियार करना पड़ रहा है। हमारे आजाद-भारत जब किसी भी जुर्म के प्रति सख्त कानून बनते हैं, उसी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने से लगती है मानो मुजरिम यह दर्शाता है जितना भी चाहे कानून हो सख्त, उसे ही सबसे पहले करेंगे हम पस्त। आखिर में इन मासूम बच्चो के साथ हो रहे इन दुष्कर्मो के प्रति कभी लगाम लग भी पाएगी या नहीं ?

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